जवाहरलाल नेहरू के निधन पर
- Chirag Jain
- Nov, 09, 2021
- Bharat Bhushan
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सिमटे तो ऐसे सिमटे तुम बन्धे पँखुरियों से गुलाब की बिखरे तो ऐसे बिखरे तुम खेत-खेत की फ़सल हो गए जब-जब गेहूँ धान पकेंगे, तुम किसान की हँसी बनोगे तीरथ-तीरथ लहर-लहर पर, किरनों से जय हिन्द लिखोगे जागे तो ऐसे जागे तुम कड़ियाँ-हथकड़ियाँ सब टूटीं सोये तो ऐसे सोये तुम कोटि-कोटि दृग सजल हो गए धरती पर पदचिह्न तुम्हारे, पृष्ठ बन गए इतिहासों के फटने से भूगोल रह गया, नखत रह गए आकाशों के घुमड़े तो ऐसे घुमड़े तुम खण्डहर को जीवन दे डाला रीते तो ऐसे रीते तुम सात समुन्दर विकल हो गए कण-कण में रचकर स्वदेश के, तुम मेहँदी से छूट गए हो प्राणों से रूठो तो जानें, जीवन से तो रूठ गए हो महके तो ऐसे महके तुम सम्मोहित बारूद हो गई दहके तो ऐसे दहके तुम सावन-भादो विफल हो गए -भारत भूषण
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