हिन्दी भाषा
- Chirag Jain
- Nov, 10, 2021
- Santosh Anand
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जिसने जन-जन के जीवन का रूप तराशा है मेरी भाषा, हिन्दी भाषा सबकी भाषा है यह कबीर-नानक की बानी, वाणी हिन्दुस्तान की यह उर्दू की सगी बहन है, बेटी है रसखान की अमर देश की अमरबेल है, ये है मेरी भारती यह पूजा है स्वतंत्रता की, नूतन युग की आरती यह हम सबका नवजीवन है, हम सबकी आशा है हिन्दी हिन्द महासागर है, हिन्दी कंचनजंघा खेत-खेत में बहती है यह जन-गण-मन की गंगा तमिल, तेलुगू, मलयालम, जय कन्नड़, उड़िया बंगा पूरब-पच्छिम-उत्तर-दक्खिन उच्छल जलधि तरंगा फलें सभी भाषाएँ -हिन्दी की अभिलाषा है एक दीये से दीया दूसरा हँसकर जोड़े हिन्दी वैरभाव के, द्वेष-क्लेश के गढ़ को तोड़े हिन्दी सब भाषाओं के वर्णों का आँचल ओढ़े हिन्दी प्रान्त-प्रान्त में खड़ी, देश की खेती गोड़े हिन्दी हिन्दी भाषा तो गांधी जी की परिभाषा है मीरा के प्रभु गिरिधर नागर, तुलसी के रघुराई हँस-हँस नाचें सूरदास के अनुपम बाल कन्हाई जिस हिन्दी की टण्डन जी ने घर-घर ज्योति जगाई पन्त, निराला, दिनकर, बच्चन ने बगिया महकाई उस पर मेरा तन-मन अर्पित जीवन प्यासा है © संतोष आनन्द
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